अपना-पराया – हरिशंकर परसाई

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अपना-पराया - हरिशंकर परसाई | Apna Paraya - Harishankar Parsai

 

  • अपना पराया एक लघु व्यंग है जो हमारी शिक्षा व्यवस्था पर कटाक्ष करता है. बेहद कम शब्दों में कैसे कटु सत्य उजागर किया जा सकता है, परसाई जी इसमें पारंगत थे.

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‘आप किस स्‍कूल में शिक्षक हैं?’

‘मैं लोकहितकारी विद्यालय में हूं। क्‍यों, कुछ काम है क्‍या?’

‘हाँ, मेरे लड़के को स्‍कूल में भरती करना है।’

‘तो हमारे स्‍कूल में ही भरती करा दीजिए।’

‘पढ़ाई-‍वढ़ाई कैसी है?

‘नंबर वन! बहुत अच्‍छे शिक्षक हैं। बहुत अच्‍छा वातावरण है। बहुत अच्‍छा स्‍कूल है।’

‘आपका बच्‍चा भी वहाँ पढ़ता होगा?’

‘जी नहीं, मेरा बच्‍चा तो ‘आदर्श विद्यालय’ में पढ़ता है।’

 

 

About The Author – Harishankar Parsai

Harishankar ParsaiHarishankar Parsai, born on 22 August 1922 in Jamani Village near Itarsi, Madhya Pradesh was a Hindi writer and a noted satirist and humorist of modern hindi literature. Parsai is known for revolutionizing the art of satire writing in Hindi.

हरिशंकर परसाई जिनका जन्म २२ अगस्त, १९२४ को जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ, हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंगकार थे. वे हिंदी के पहले रचनाकार हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और उसे हल्के–फुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा.

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