इन्टरनेट की टाइममशीन – वे बेक मशीन से परिचय

टाइम मशीन शायद एक ऐसी चीज़ है जिसनें हममे से जाने कितनों को फैसनेट किया है. टीवी पर या किसी फिल्म में या किताबों में हम टाइम मशीन का जिक्र सुनते हैं तो कुछ पल के लिए हमारा दिल  भी करता है कि काश एक टाइममशीन हमारे पास भी होती जिसमें बैठ के हम पुराने ज़माने में पहुँच जाते और देखते कि वो वक़्त कैसा था. लेकिन अफ़सोस  ये टाइम मशीन बस कहानियों और फिल्मों में ही होते हैं, हकीकत में कोई टाइम मशीन ना तो है और न शायद कभी होगी. लेकिन इन्टरनेट के पास ऐसी  टाइम मशीन उपलब्ध है जिसकी मदद से आप इन्टरनेट के पुराने ज़माने में वापस जा सकते हैं और देख सकते हैं कि इन्टरनेट पहले कैसा था. मसलन अगर आपका कभी दिल करे ये देखने के लिए कि फेसबुक जो आज हम लोग इस्तेमाल करते हैं , वो पहले कैसा था तो आप इन्टरनेट के टाइम मशीन के जरिये देख सकते हैं. इन्टरनेट के इस चमत्कारी टाइम मशीन का नाम है वेबैक मशीन (WayBack Machine).

सरल शब्दों में कहे तो वेबैक मशीन  इन्टरनेट का एक डिजिटल आर्काइव है जिसमे असंख्य वेबसाइट सहेजे गए हैं. इसकी शुरुआत ब्रेवस्टर केल और ब्रूस  गिलियट ने साल 2001 में की थी. इन्टरनेट के इस डिजिटल आर्काइव  को इस मकसद से शुरू किया गया था कि इन्टरनेट पर जितने भी वेबपेज हैं सभी को एक ऐसी  पब्लिक लाइब्रेरी में रख दिया जाए जिसे  कोई भी व्यक्ति जब चाहे,  देख सकता है. अब तक करीब 4 मिलियन से भी ज्यादा वेबसाइट और  करीब 500 बिलियन वेब पेज को वेबैक मशीन ने सहेजा है. रिसर्च और पढ़ाई सम्बंधित कितने काम ऐसे हैं जिसे वेबैक मशीन ने आसान बनाया है. वेबैक मशीन में हर वेब पेज सुरक्षित रखा जाता है, कल को अगर वो वेबसाइट या पेज डिलीट भी हो गया तो भी आप इस वेबैक मशीन के जरिये उस पेज को आराम से पढ़ सकते हैं. जैसे मेरा ये ब्लॉग का पेज देखिये जिसे मैंने साल 2002 में बनाया था. उस ब्लॉग को मैंने डिलीट कर दिया था. लेकिन इस मशीन के जरिये मैं फिर से उस ब्लॉग के पेज को आसानी से पढ़ सकता हूँ.वेबैक मशीन समय समय पर सभी वेबसाइट को क्रॉल( Crawl जिसे हम Internet Crawl भी कहते हैं, एक वेब रोबोट है जो हर वेब पेज को क्रमानुसार ब्राउज करता है ताकि उसे सूचीबद्ध किया जा सके) करती है और उसका डेटा इनके डिजिटल अकाईव में सुरक्षित रख दिया जाता है. कुछ इन्टरनेट की संस्था जैसे Alexa, NARA, IMF की मदद से वेबैक मशीन सभी वेबपेज को क्रॉल करती है और अपने आर्काइव में जोड़ देती है. वेबैक मशीन का इस्तेमाल करने पर कभी कभी महसूस होता है कि जैसे हम इन्टरनेट पर टाइम ट्रैवेल कर रहे हैं. इस इंटरनेट आर्काइव का नाम वेबैक मशीन भी एक टाइममशीन के ऊपर ही रखा गया है. एक कार्टून सीरिज ‘रॉकी एंड द बुलविंकल’ में एक टाइममशीन “WABAC machine” को दिखाया है. इन्टरनेट के इस आर्काइव का नाम भी इसी से प्रेरित होकर WayBack Machine रखा गया है.

अब चलिए देखते हैं इस वेबैक मशीन का आप इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. इसे इस्तेमाल करने के दो तरीके हैं. पहला तो ये कि आप वेबैक मशीन की वेबसाइट खोलें और किसी भी वेबपेज का नाम लिखकर उसका टाइमट्रेवल कर लें.

वेबैक मशीन के वेबसाइट में जाकर उस वेबसाइट का नाम लिखे जिसे आप देखना चाहते हैं
दूसरा रास्ता है कि आप अलेक्सा का टूलबार इंस्टाल कर लें और जिस भी वेबसाइट को आप टाइमट्रेवल करना चाहते हैं उसे ओपन कर के टूलबार में से वेबैक मशीन का आप्शन चुनें. नीचे लगी तस्वीर देखिये.

जिस वेबसाइट को आप देखना चाहते हैं उसे ओपन कर के टूलबार में से वेबैक मशीन पर क्लीक कीजिये

जैसे ही आप ब्राउज हिस्ट्री पर क्लीक करेंगे एक टाइमलाइन और  कैलेण्डर खुल जायेगा. कैलेण्डर ब्लू रंग से हाईलाइट किया मिलेगा. इसका मतलब इस साल ये वेबसाइट जिस जिस दिन वेबैक मशीन के द्वारा क्रॉल किया गया है और जिस भी दिन का डेटा वेबैक मशीन के पास  है उस भाग को हाईलाइट कर दिया गया है. जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं कि गूगल को लगभग हर  दिन और एक दिन में कई बार क्रॉल किया गया है.

अब हम तो जानते है इस साल गूगल का रूप कैसा है, तो चलिए ज़रा 1998 में चल कर देखे कि उस समय गूगल की शकल सूरत कैसी थी. उस समय के गूगल को वेबैक मशीन में देखने के लिए टाइमलाइन में 1998 चुनिए (जैसे तस्वीर में दिख रहा है) और गौर कीजिये कि किस दिन का डेटा सुरक्षित किया गया है. इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि 1998 में  ग्यारह नवम्बर और दो दिसंबर को ये वेबसाइट क्रॉल किया गया था. तो चलिए देखते हैं कि कैसा दिखता था गूगल उस दिन

 

दोनों तारीख पर क्लिक  करने के बाद मुझे कुछ ऐसा परिणाम मिला. ये गूगल का पुराना और सबसे पहला रूप था.

गूगल का सबसे पहला पेज इन्टरनेट पर

 

लांच के अगले महीने गूगल का ये रूप

1998 की बात करें तो उन दिनों हममें से बहुत कम होंगे जो इन्टरनेट का इस्तेमाल करते थे. ये वेबैक मशीन लगभग सभी वेबसाइट का टाइम ट्रेवल आपको करवा देती है. चलिए अब ज़रा कुछ और वेबसाइट पर नज़र डाले कि वो सब कैसे दिखते थे.आज के ही कुछ चर्चित वेबसाइट पर नज़र  डालते हैं. शुरुआत करते हैं आज के सबसे चर्चित वेबसाइट फेसबुक.कॉम से. चलते हैं फिर उसी  साल के आसपास जहाँ से हमने अभी गूगल का पुराना पेज देखा था. यानि चलते हैं 1999 में. प्रक्रिया वही है वेबसाईट देखने के लिए जो आपने ऊपर देखा. वेबैक मशीन में facebook.com लिखे और ब्राउज हिस्ट्री पर क्लिक  करें.

1999 में जनवरी तारीख पर क्लिक  करने के बाद जो वेबपेज सामने आया वो थोड़ा चौंकाने वाला है. खुद ही देखिये आप –

परिणाम देखककर कुछ आश्चर्य  हुआ न? हमें तो फेसबुक का डेटा देखा था लेकिन यहाँ तो कोई और ही वेबपेज खुल गया. चौंकिए मत..दरअसल बात ये है कि फेसबुक की शुरुआत हुई थी 2004 में, और उसके पहले फेसबुक डॉट कॉम डोमेन इस कंपनी के नाम से रजिस्टर्ड था  जो ऊपर दिख रहा है.

फेसबुक की जब शुरुआत हुई थी उस समय फेसबुक का नाम ‘द फेसबुक’ था. इसलिए  फेसबुक का पहला पेज को देखने के लिए आपको वेबैक मशीन में thefaceboook.com लिखना पड़ेगा.

जिस फेसबुक को हम आज इस्तेमाल करते हैं उसका पहला पेज आर्काइव हुआ था नवम्बर 2005 में.. ये देखिये उस वेबपेज को –

साल दर साल फेसबुक का रूप कुछ इस तरह से बदलता रहा..

अब चलिए ट्विटर का रुख करते हैं और देखते हैं ट्विटर का रूप साल दर साल कैसे बदला है. प्रक्रिया वही जिसके जरिये हमनें फेसबुक देखा था.

ट्विटर जिसे आज हम जानते हैं वो 2006 में शुरू हुआ था लेकिन शायद कुछ लोग ये नहीं जानते होंगे कि ये  पहले twttr.com था जो कुछ इस तरह दिखता था.

ये तो  बातें थी आज के तीन सबसे चर्चित वेबसाइट की. अब देखते हैं एक ऐसे वेबसाइट की कहानी जो नब्बे के दशक में इन्टरनेट पर राज करती थी. जी हाँ, याहू डॉट कॉम. चलिए देखते हैं याहू डॉट कॉम पहले कैसा दिखता था. शुरुआत करते हैं याहू के सबसे पहले  पेज से.

ये पेज याहू का साल 1996 से लिया गया है. वेबैक मशीन से याहू पर टाइमट्रेवल करने पर हमें याहू के कुछ ऐसे ऐसे रूप देखने को मिलते हैं. लेकिन हाँ, याहू के ज्यादा अलग अलग रूप देखने को नहीं मिलते  हैं.

अभी हमारे पास इन्टरनेट पर सर्च करने के लिए वैसे तो बहुत सर्च इंजन है लेकिन हम लोग में से अधिकाँश गूगल के भरोसे रहते हैं. ज़रा याद करने की कोशिश कीजिये कि गूगल के पहले किस सर्च इंजन का नाम ध्यान में आ रहा है? जी हाँ..वही अल्टाविस्टा जो कि नब्बे के आखिर तक लोगों का सबसे प्रिय सर्च इंजन था और बाद में जिसे याहू ने खरीद लिया था. देखिये जब altavista.com की शुरुआत हुई थी कि वो कैसा दिखता था

काफी समय तक इन्टरनेट पर राज किया है इस वेबसाइट ने. देखिये उस समय कैसे  कैसे वेबसाइट में बदलाव आया..

इंटरनेट के इस टाइममशीन का इस्तेमाल करना बेहद आसन है. इस वेबसाइट को इस्तेमाल करने के लिए कोई जरूरी नहीं की आप कंप्यूटर एक्सपर्ट हों. मैंने कुछ साल पहले इसके बारे में सुना था. इधर के दिनों में वेबैक मशीन का कुछ ज्यादा ही इस्तेमाल करना पड़ा है मुझे, तो मैंने सोचा क्यों न इसके बारे में कुछ लिखा जाए, शायद जो  नहीं जानते होंगे इस वेबसाइट के बारे में उन्हें कुछ नयी और रोचक जानकारी मिले. ये पोस्ट बस पहला भाग है इस टाइममशीन के बारे में. अगली  पोस्ट में इस  टाइममशीन के जरिये चलेंगे पहले ज़माने के इन्टरनेट की सैर पर…

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