एक पारिवारिक डायरेक्टर – सूरज बड़जात्या

जब मुझे फिल्मों की ज्यादा समझ नहीं थी, तब से ही वो मेरे सबसे पसंदीदा फिल्म-मेकर हैं. मेरे आस पास जो दोस्त रहते थे, उन सब में भी एक बात सामान्य थी…हम सभी उनकी बनाई हुई फिल्मों के जबरदस्त फैन हैं… .हम उनकी बड़ाई करते नहीं थकते थे. फिल्मों की दुनिया में एक से एक डायरेक्टर हैं जिन्होंने एक से बढ़कर एक फ़िल्में बनाई है. लेकिन आज भी मेरे पसंदीदा फिल्म-मेकर में शायद इनका नाम सबसे ऊपर है. शायद मैं आज भी अपने पसंदीदा डायरेक्टर के श्रेणी में उन्हें पहले स्थान पे रखूँगा. ..वो फिल्म मेकर जिसने पारिवारिक फिल्मों को एक नया नाम दिया, एक नया आयाम दिया. उनका नाम है – सूरज बड़जात्या. एक ऐसा डायरेक्टर जिन्हें भारतीय सिनेमा का एक चेहरा कहा जा सकता है. जिन्होंने पारिवारिक मूल्यों और हिन्दुस्तानी तहजीब को हमेशा अपने फिल्मों के जरिये दिखलाया है.

अपने शुरुआती दिनों की याद करते हुए सूरज बड़जात्या कहते हैं कि “पढ़ाई में, स्कूल में मैं बेहद ही साधारण लड़का था. इतना कि टीचर या अन्य लोगों को मेरा नाम तक नहीं पता था. पढ़ने में कभी मैंने दिलचस्पी नहीं ली और इसी चलते मुझे दसवीं कक्षा में इतने कम नंबर आयें कि आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला होना मुश्किल हो गया. “सूरज कहते हैं की “मेरे पिता ने हमेशा पढ़ाई से ज्यादा पारिवारिक मूल्यों को महत्व दिया है और मुझे शुरू से अपने देश की संस्कृति और सभ्यता के बारे में बताते रहे हैं”. सूरज बड़जात्या बताते हैं कि वो राजकपूर के जबरदस्त फैन रह चुके हैं, और राजकपूर के फिल्मों ने उनपर बहुत गहरा असर किया है. सूरज कहते हैं कि उनका फिल्मों में आने का कोई इरादा नहीं था, और उनके परिवार में से भी कोई नहीं चाहते थे कि वो फिल्मों में आये, लेकिन जब राजश्री प्रोडक्सन बेहद घाटे में जाने लगी और एक वक्त ऐसा आया जब लगा अब राजश्री प्रोडक्सन पे ताला लग सकता है तब उन्होंने ये निर्णय लिया की वो फिल्म बनायेंगे.

फिल्म मेकिंग तो उनके खून में ही बसा हुआ है. उनके दादा जी, श्री ताराचंद बड़जात्या एक बहुत ही सफल फिल्म निर्माता थे. उन्होंने ही राजश्री प्रोडक्सन की स्थापना की थी. राजश्री प्रोडक्सन हलके-फुलके पारिवारिक फिल्मों के लिए ही जाना जाता है. अपने प्रोडक्सन हाउस को बचाने के लिए जब सूरज बड़जात्या फिल्मों की दुनिया में उतरे तो उन्होंने एक प्रेम कहानी को अपने फिल्म का विषय चुना. बहुत से लोगों ने उनसे कहा कि ऐसी फ़िल्में नहीं चलेंगी क्योंकि वो दौर एक्सन और गैंगस्टर थीम वाले फिल्मों का था…लेकिन सूरज को अपने फिल्म पर विश्वास था, उन्होंने ये फिल्म सबके मना करने के बावजूद बनाई, और परिणाम क्या हुआ ये सभी अच्छे से जानते हैं. “मैंने प्यार किया” हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है. प्रेम और सुमन के किरदारों ने लोगों का दिल जीत लिया था. युवा दर्शक इन्हें एक आइकान के रूप में देखने लगे. लोग बार बार प्रेम और सुमन की प्रेम-कहानी देखने सिनेमा हॉल आते रहे…इसे सूरज का जादू ही कहिये कि एक नयी प्रेम कहानी वाली इस फिल्म को दर्शकों ने इतना सराहा और इतना प्यार दिया. इस एक फिल्म से सूरज बड़जात्या को हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री के टॉप के फिल्म-मेकर के श्रेणी में ला पहुंचा दिया था. सूरज ने इस फिल्म से अपने कैरियर की शुरुआत तो की ही, साथ में ही सलमान खान जैसे सुपरस्टार ने भी अपने कैरिअर की शुरुआत की थी.(हालांकि सलमान की पहली फिल्म ‘बीवी हो तो ऐसी’ थी).

सूरज जब भी फ़िल्में बनाते तो आलोचक भी बुराई करने में पीछे नहीं रहते. चाहे वो इनकी फिल्मों के विषय हों या फिर कुछ और. लोग हर बार उन्हें ये कहते कि वो गलत फिल्म बना रहे हैं. यही हुआ जब वो अपनी दूसरी फिल्म बना रहे थे -“हम आपके हैं कौन”. बहुत से लोगों ने उस वक्त कहा कि “ये तो एक मैरेज विडियो की शूटिंग कर रहे हैं आप”. ऐसी आलोचना उन्हें हमेशा झेलनी पड़ी.. खैर, फिल्म देखने के बाद उन आलोचकों को बोलने के लिए कुछ बाकी नहीं रह गया होगा. “हम आपके हैं कौन” फिल्म ने एक नए फारमूला को जन्म दिया. पारिवारिक फिल्मों के फारमूले का.. दर्शक इस फिल्म में डूब से गए, ये फिल्म देखते वक्त दर्शक भी ये महसूस करते कि वो भी उसी परिवार का एक हिस्सा हैं जिन्हें वो परदे पे देख रहे हैं. फिल्म के संगीत में ऐसा सम्मोहन कि लोग आज भी बंध के रह जाते हैं. दर्शक ये फिल्म देखने वक्त हँसते भी, और रोते भी. सूरज ने फिल्मों में परिवार के हलके फुलके पल को बेहद खूबसूरती से दिखाया है. ये बात सूरज खुद मानते हैं कि उनके फिल्म में कहानी से ज्यादा ज्यादा मजबूत फिल्म का ट्रीटमेंट होता है. वो कहते हैं कि मेरी जीत इसी में है कि जो मैं किसी किरदार के बारे में सोचता हूँ उसे पर्दे पे सफलतापूर्वक दिखा सकूँ. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के पिछले सारे रिकॉर्ड को तोड़ दिया था. कामयाबी का एक अलग कीर्तिमान स्थापित किया था फिल्म ने. इस फिल्म के अभिनेता सलमान खान, जो कि सूरज बड़जात्या के बहुत अच्छे दोस्त भी हैं, कहते हैं “सूरज बड़जात्या ऐसी फिल्म इसलिए बना लेते हैं कि वो भारतीय संस्कृति, सभ्यता, तहजीब से बहुत जुड़े हुए हैं” .फिल्म के बारे में सलमान खान कहते हैं “ये फिल्म हमें अपने सस्कृति, सभ्यता के तरफ वापस ले के जाता है. जब आप ये फिल्म देख रहे हो और अगर आपके घर में कोई किसी कारणवश आपसे रूठा हुआ है तो आप फिल्म देख के वापस अपने घर उन्हें मनाने जाना चाहते हैं…यही इस फिल्म की सबसे बेहतरीन बात है. हमें अपने परिवार से जोड़ती है ये फिल्म “.

सूरज बड़जात्या की पहली फिल्म में भी सलमान खान थे, दूसरी में भी और तीसरी फिल्म में भी. तीसरी फिल्म उनकी थी “हम साथ साथ हैं”. ये फिल्म हालांकि “हम आपके हैं कौन” जितनी सफलता तो नहीं पा सकी लेकिन फिर भी ये उस साल की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में से रही. इस फिल्म में सूरज बड़जात्या ने रामायण को आज के परिवेश में दिखाने की कोशिश की है और वो इसमें बेहद ही सफल भी रहे. भाई-बहन का प्यार और रिश्तों की गर्माहट लिए ये फिल्म आपको एक सुखद अनुभूति देती है. इस फिल्म के हर कलाकार ने अपने किरदार में जान डाल दी है. तीन भाइयों के बीच का प्रेम को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है. फिल्म के गाने भी बेहतरीन हैं.”सुनो जी दुल्हल एक बात सुनो जी” वाले गाने में पारिवारिक मस्ती और हंसी मजाक को बड़े ही अच्छे से दिखाया है सूरज ने. हर गाने को बहुत खूबसूरती से फिल्माया गया है. सूरज बड़जात्या की सबसे बड़ी ताकत इस बात में है कि वो फिल्म के भावुक पलों में दर्शक को फिल्म के साथ जोड़ने की गज़ब की शक्ति रखते हैं. ये बस इसलिए हो पाता है कि कहीं न कहीं दर्शक फिल्म से एकदम कनेक्ट से हो जाते हैं, वो समझते हैं कि ये जो भी हो रहा है वो उनके साथ ही हो रहा है.. भाई बहनों की शरारतें, मस्ती, और भावुक पलों से सजी ये फिल्म हर लिहाज से एक बेहतरीन फिल्म है. मेरे लिए तो ये फिल्म बहुत मायनों में खास है, और वो शायद इसलिए कि मैं इस फिल्म से बहुत कनेक्टेड महसूस करता हूँ. मुझे लगता है जैसे की मैं भी इस फिल्म के उन किरदारों के बीच ही कहीं हूँ.

 

तीन फिल्मों की सफलता के बाद सूरज ने तय किया की इस बार नए ज़माने की फिल्म बनाया जाये, जिससे नेक्स्ट जेनरेसन के युवा भी कनेक्ट हों, और उन्होंने अपनी अगली फिल्म “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” की घोषणा की. उस समय के हॉट स्टार हृतिक रोशन को उन्होंने फिल्म में लिया. हृतिक के साथ फिल्म में थे अभिषेक बच्चन और करीना कपूर. इस फिल्म की कहानी राजश्री प्रोडक्सन की ही एक फिल्म “चितचोर” से ली गयी थी. इस बार सूरज से लोगों ने कहा कि ये फिल्म जरुर चलेगी, क्यूंकि इस फिल्म के ट्रीटमेंट में एक नयापन है. नतीजा अलग हुआ. फिल्म नहीं चली. हालांकि फिल्म को फ्लॉप नहीं कहा जा सकता लेकिन इसे एक सफल फिल्म भी नहीं कहा जा सकता. फिल्म का संगीत लोगों को जरूर पसंद आया लेकिन फिर भी इस फिल्म में सूरज के एक्सक्लूसिव और जादुई टच की अपार कमी महसूस हुई.

“मैं प्रेम की दीवानी हूँ” के बाद सूरज बड़जात्या को इस बात का यकीन और ज्यादा हो गया कि उनकी फिल्मों के सफल होने का एकमात्र फार्मूला है, और वो है अपनी संस्कृति और तहजीब की फ़िल्में बनाना. सूरज ने इस बात को समझते हुए तय किया कि वो राजश्री के वसूलो पे ही चलते हुए फ़िल्में बनायेंगे जिनसे भारतीय दर्शक अच्छे से जुड़ सके, और उन्होंने अपनी पांचवीं फिल्म “विवाह” की घोषणा की. इस फिल्म को बनाने के वक्त भी बहुत से लोगों ने सूरज को चेतावनी दी की ये फिल्म किसी भी लिहाज से नहीं चलेगी. आज के दर्शक ऐसी फ़िल्में देखना नहीं पसंद करेंगे. सूरज ने सबकी बातों को अनसुना कर दिया. फिल्म जब रिलीज हुई तो उन सब लोगों की बोलती बंद हो गयी जो पहले इस फिल्म के सफल होने में आशंका जता रहे थे. फिल्म एक ब्लॉकबस्टर निकली. उस साल ही सबसे बड़ी हिट फिल्म. दर्शकों ने प्रेम और पूनम के किरदारों को खूब सराहा. सगाई से शादी तक के सफर की कहानी इस फिल्म में दिखाई गयी थी. इस फिल्म का जादू सब पे चला. बच्चे, बूढ़े, युवा सब इस फिल्म की तारीफ़ करते नहीं थकते. हिप हॉप युवा पे भी विवाह का जादू सर चढ़ के बोला. वो लोग जो प्रेम कहानियों को देखने से कतराते थे, इस फिल्म को बार बार देखने सिनेमा हॉल जाते रहे. भारतीय संस्कृति, सभ्यता और प्रेम को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है सूरज ने. विदेशों में बसे भारतीय को ये फिल्म भी विशेष पसंद आई. इस फिल्म के मुख्य किरदार शाहिद कपूर और अमृता राव ने गज़ब का संतुलित अभिनय किया है. शाहिद और अमृता के लिए सूरज जी कहते हैं -Shahid to perform with such conviction is amazing..As for Amrita she surrendered her soul to “Vivah”. फिल्म का संगीत भी बेहद ही सुकून देने वाला है. विवाह फिल्म की कहानी एक वास्तविक घटना पे आधारित है. सूरज जी बताते हैं कि उनके पिता ने करीब १५ साल पहले अखबार में एक आर्टिकल पढ़ा था, और उस आर्टिकल से वो इतने प्रभावित हुए कि उसे सहेज कर रख लिया. विवाह फिल्म उसी अखबार के आर्टिकल पे आधारित है.

सूरज बड़जात्या ने अब तक पांच फिल्मों का निर्देशन किया है – मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ साथ हैं, मैं प्रेम की दीवानी हूँ और विवाह. इसमें अगर “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” को छोड़ दें तो बाकी की सभी फ़िल्में बेहद सफल रही हैं. सूरज कहते हैं कि जब भी वो फ़िल्में अपने पिता के पसंद की बनाते हैं तो वो फ़िल्में सफल होती हैं. सूरज कहते हैं कि “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” का विषय उन्होंने खुद चुना था, और वो सफल नहीं रही. जबकि उनकी बाकी के चार फिल्मों का चुनाव उनके पिताजी ने किया था और सभी फ़िल्में बेहद सफल रही.
जब सूरज को मैंने प्यार किया के लिए फिल्मफेअर अवार्ड मिला तो उन्होंने कहा कि वो ये फिल्म इस लिए बनाये क्योंकि कहीं न कहीं वो चाहते थे की उनके साथ ऐसा हो. सूरज के मुताबिक जो वो बनना चाहते हैं उसे वो लोगों के सामने फिल्मों के जरिये प्रस्तुत करते हैं. उनके सारे किरदार उनके खुद के कल्पना से बने हैं.

सलमान खान और सूरज बड़जात्या बहुत गहरे दोस्त हैं. सूरज ने फैसला किया था कि जब भी वो फिल्म बनायेंगे तो सलमान खान के साथ ही बनायेंगे, क्योंकि उनके मुताबिक सलमान से बेहतर उन्हें और कोई समझ नहीं सकता. लेकिन जब फिल्म “हम साथ साथ हैं” के शूटिंग के दौरान सलमान खान “ब्लैकबक शिकार” के केस में फंसे तो सूरज बड़जात्या के पिता राजकुमार बड़जात्या ने सलमान से दूर रहने का हुक्म दिया सूरज को. सूरज का परिवार एक बेहद डिसप्लनड और कड़े नियम कानून में रहने वाला परिवार है. सूरज को मजबूरी में सलमान से दूरी बनानी पड़ी. विवाह फिल्म जब सफल हुई तो सूरज बड़जात्या से पुछा गया कि क्या आप सलमान खान को फिल्म बनाने के समय मिस करते हैं? सूरज ने इस बात का जवाब कुछ इस कदर दिया – “विवाह फिल्म के लिए भी सलमान को ध्यान में रखते हुए ही ‘प्रेम’ के कैरेक्टर की रचना हुई थी..लेकिन किसी करणवश सलमान फिल्म से नहीं जुड़ पाए, लेकिन फिल्म को लेकर जब मैं बेहद संशय में था, तब सलमान ने ही मुझे कहा कि उन्हें ये फिल्म बनानी चाहिए. शूटिंग के दौरान हर बार प्रेम के जिक्र से ही मुझे सलमान की याद आ जाती. The character of Prem was given birth by Salman and character Prem was Immortalised on silver screen by Salman.”जब “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” नहीं चली तब बहुत से लोगों ने सूरज पे ये इल्जाम लगाया कि हृतिक रोशन उस फिल्म में सलमान की नक़ल कर रहे थे. जैसे सलमान ने पहले के तीन फिल्मों में प्रेम के कैरेक्टर को निभाया था, हृतिक बिलकुल वैसा ही करने की कोशिश कर रहे थे क्यूंकि सूरज बड़जात्या ऐसा चाहते थे. इस फिल्म के असफलता के बाद राजश्री प्रोडक्सन के लोगों ने ये कहना शुरू कर दिया कि सूरज बड़जात्या अब कभी फिल्म नहीं बनायेंगे…वो कभी फिल्म बना ही नहीं पायेंगे, क्योंकि वो अपनी फिल्म में सलमान के सिवा और किसी दूसरे एक्टर को रखकर फिल्म बनाने का सोच भी नहीं सकते. सलमान के बिना सूरज बड़जात्या की स्क्रिप्ट ही अधूरी है. सलमान और सूरज एक दूसरे को ऐसे समझते हैं कि लोगों को लगता है की वो जुड़वाँ भाई हों. राजश्री प्रोडक्सन के कुछ लोगों की माने तो “मैं प्रेम की दीवानी हूँ” और “विवाह”, दोनों ही फ़िल्में सलमान को ध्यान में ही रख कर लिखी गयी थी. विवाह बनाने के बाद सूरज ने ये कहा कि वो बहुत शिद्दत से चाहते हैं कि सलमान के साथ फिल्म बनायें. उन्होंने एक इन्टर्व्यू में ये तक कह दिया “With salman, I want to make something very special”. सूरज के परिवार में भी सब चाहते हैं की वो फिर से डायरेक्शन के तरफ लौटें. फ़िलहाल के लिए ये सुनने में आया है कि सलमान की वापसी फिर से राजश्री प्रोडक्सन में हो गयी है. राजश्री के बैनर में ही बन रही एक फिल्म “इसी लाइफ में” में सलमान खान गेस्ट भूमिका में नज़र आयेंगे. वहीँ ख़बरें ये भी है की सूरज बड़जात्या भी अपनी अगली फिल्म बनाने में लगे हुए हैं, और उस फिल्म में मुख्य भूमिका में सलमान खान हैं. लगता है अब फिर से सूरज बड़जात्या और सलमान खान अपना जादू दिखाने वाले हैं.(source : times of india)

 
सूरज बड़जात्या के साथ सफर अगर हो सका तो अगले पोस्ट में भी जारी रखूँगा..शायद उनके कुछ इन्टर्व्यू में दिये गए सवालों के कुछ रोचक जवाब पोस्ट करूँ..लेकिन ये तय नहीं है की अगला पोस्ट लिखूंगा ही.
चलते चलते, सूरज  ने एक बार जो कहा,

I have no friends as such: I have few ‘real’ friends in the film industry. People complain that I don’t socialize or seek the limelight, but I don’t miss not being close to people outside the family. I have a strong family ties; maybe because I am a traditionalist at heart.

God has given me more than I asked for: I see myself in my elder son Devansh, 13, who wants to become a film-maker. He loves being on the sets and I encourage him. My younger son Avnish, 10, is business-minded. My five-year-old daughter Isha is the light of my life. I would like to bring up my children like I have been brought up. I will let them do what they want to. Tomorrow, if Isha wants to become an actress, she is free to pursue her choice.
Man makes his own destiny: Success comes with being honest to one’s dreams and self. I am not superstitious. I believe in karma. I don’t need more money than I can gainfully utilize. Had I been money-hungry, I would have made a film each year. I want to be fair to myself and viewers. I go by what the Quran Sharif says: one reaps the results of one’s deeds. I believe that as you sow, so shall you reap.
 

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  1. मुझे उनकी फिल्म के सिर्फ हीरो अच्छे लगते हैं :)बाकी फिल्म ड्रामा 🙂

  2. "जब मुझे फिल्मों की ज्यादा समझ नहीं थी" बोल तो ऐसे रहे हो जैसे अब बहुत समझ है.. ये वही बात हुई जैसे कोई बच्चा बोलता है कि "अब मैं बड़ा हो गया हूँ".. 😛

    "पढ़ाई में, स्कूल में मैं बेहद ही साधारण लड़का था.." क्या सोचते हो, तुम भी पढ़ाई में कमजोर थे तो तुम भी बडजात्या बन जाओगे? 😛

    "सूरज बड़जात्या बताते हैं की वो राजकपूर के जबरदस्त फैन रह चुके हैं, और राजकपूर के फिल्मों ने उनपर बहुत गहरा असर किया है." उसी का असर है जो इत्ता पकाऊ सिनेमा बनाते हैं बडजात्या.. अब जाकर समझ में आया सारा किस्सा.. 😉

    "सूरज कहते हैं की उनका फिल्मों में आने का कोई इरादा नहीं था, और उनके परिवार में से भी कोई नहीं चाहते थे की वो फिल्मों में आये" पता नहीं कौन लेकर आया उन्हें.. मिल जाए मुझे तो नट्टी टीप देंगे.. ना वो लाता और ना ये ऐसा सिनेमा बनाते.. 😀

    " बहुत से लोगों ने उस वक्त कहा की "ये तो एक मैरेज विडियो की शूटिंग कर रहे हैं आप". ऐसी आलोचना उन्हें हमेशा झेलनी पड़ी" जमाना ही ऐसा है, कोई सच बोलता है तो लोग आलोचना का नाम दे देते हैं.. हे हे हे…

    ""सूरज बड़जात्या ऐसी फिल्म इसलिए बना लेते हैं की वो भारतीय संस्कृति, सभ्यता, तहजीब से बहुत जुड़े हुए हैं" बेचारा सलमान इसीलिए ऐसा सिनेमा नहीं बना पाता है.. 😛

    "इस फिल्म की कहानी राजश्री प्रोडक्सन की ही एक फिल्म "चितचोर" से ली गयी थी" बेचारे के पास अपनी कहानी तो है नहीं, बाप दादा के नाम को भुना रहा है.. 😛

    "मैं प्रेम की दीवानी हूँ" बाप रे.. इत्ता पकाऊ सिनेमा.. जो दीवानी होगी भी उसे दिखा दो तो वो सुसाइड कर लेगी..

    "अगर हो सके तो, जब आप टिपण्णी करें तो ये भी लिखे की आपको सूरज बड़जात्या की कौन सी फिल्म अच्छी लगी और क्यों" सिर्फ मैंने प्यार किया अच्छी लगी.. क्यों? अरे भाई बच्चा थे तब, कुछ समझते नहीं थे.. बचपन कि गलती ही समझ लो मेरा.. 😛 😛

    सबसे अंत में, क्या सोचते हो? ब्लॉग को लोंक कर दोगे तो कापी नहीं कर पायेंगे? सब तो कापी करके यहाँ टीप रहे हैं.. का कल्लोगे? 😛 😛 😀

  3. इतना कुछ बताया उनके और उनकी फिल्मों के बारे में….. धन्यवाद
    उनकी सभी फ़िल्में पारिवारिक रही हैं….पर विवाह बहुत हकीकत परक सी लगी…..

  4. प्रशान्त बाबू पगला गए हैं…कृपया उनकी टिप्पणियों पे ज्यादा ध्यान न दें…:)

  5. जमाना ही यही है दोस्त.. कोई सच बोलता है लोग पागल कह कर नकार देते हैं.. 😛

  6. प्रशान्त तुम चेन्नई में रह कर बहुत समझदार हो गए हो दोस्त….कसम से क्या समझदारी वाली बातें करते हो…वैसे मैं तुम्हारे हालात को अच्छी तरह से समझ सकता हूँ 🙂 मुझे हमदर्दी है तुमसे 🙂 😛

  7. कसम से, आज जो भी सच बोलता है उसे पागल, मानसिक रूप से अस्वस्थ इत्यादि कह कर नकारा जाता है..
    अरे कोई तर्क हो मार्केट में तो वो भी लाया जाए.. 😛

  8. तर्क उसे दिया जाता है जिसमे तर्क समझने की क्षमता हो…समझे बाबू 🙂
    और वैसे भी फ़ालतू में हम अपने तर्क के स्टॉक को क्यों खत्म करें जी ???:P

  9. मतलब तर्क नहीं है तो पागल बोलेगा रे लड़का? यहीं चेन्नई से आम का आँठी फ़ेंक के मारेंगे कि कपाड़े फोड़ देंगे..

  10. हमें तो अपने अल्हड़पने की "मैंने प्यार किया" बहुत ही पसंद है, और गाने तो सबके सब एक से एक..

    फ़िर बाकी की फ़िल्में इतनी गौर से कभी देखी नहीं और देखीं भी तो इतनी लगन से नहीं देखीं जितनी "मैंने प्यार किया" देखी थी।

    वैसे पीडी सही कह रहा है, वह चैन्नई में रहकर भी गजब का कंट्रोल रखे हुए है, इस बार भी पीडी हमसे मिलने आया था, पर इस मुलाकात को हमने कहीं भी उजागर नहीं किया।

  11. "आम का आँठी" पीडी एट्ठो हमारी ओर से भी.. 🙂

  12. विवेक भैया के कमेन्ट को "Like" (हम आज इसको भी फेसबुक बनाने पर लग गए हैं.. 🙂 )

  13. अभी तो बहुत डायलोग बचा कर रखे हुए हैं इस लड़का के लिए.. इसके मुड़ी पर तो आँठी का बरसात कर देंगे.. आप खाली हुकुम तो कीजिये.. 😀

  14. वैसे पीडी सही कह रहा है, वह चैन्नई में रहकर भी गजब का कंट्रोल रखे हुए है,


    भईया इस बात का मतलब मैं क्या ये समझ लूँ की प्रशान्त अगर चेन्नई से आम का आँठी फेंकेगा तो निशाना एकदम सही बैठेगा??? 😀
    तब तो मुझे डरना चाहिए

  15. सब इसको फेसबुक का अखाड़ा बना दिये हो…ई प्रशान्त जो न कराये….रांची चले जाओ रे लड़का…इलाज का पईसा हम दे देंगे 🙂

  16. फिर आया बक-बक करने.. बोल रहे हैं.. समझा रहे हैं.. समझ लो.. नहीं तो इत्ता गोली मारेंगे कि सात पुश्त उसका खोखा बेच के खायेगा.. बूझा के नै बूझा?

  17. जाना ही पड़े तो आगरा जायेंगे.. "प्रेम" (बडजात्या बला नहीं, चलो वही बला सही :P) का मकबरा है वहाँ पर..

  18. नै बुझे रे…तुम्हारा फ़ालतू बात पे दिमाग लगाने का मन भी नहीं कर रहा है…इसको फेसबुक बनाइये लिए हो तो एक बात और सुन लो…हम जा रहे हैं सुते…अब कल्हे कमेन्ट कर के बताते हैं तुमको…

    फेसबुक स्टाइल में "गुड नाईट टू विवेक भईया…" प्रशान्त जाये भाड़ में 🙂

  19. रे लईका रे.. डर गया का? जाओ सुतो.. सपना में बड़का बला बड़जात्या का भूत आएगा..
    अरे रामसे ब्रदर तुमको अच्छा नहीं लगता है का? ऐसे ही पूछ रहे थे.. तुमको बड़जात्या अच्छा लगता है ना.. 😛

  20. मैनें प्यार किया. क्योकि इस फिल्म ने मार धाड़ से अलग एक प्यार भरी फिल्मों की पुनः नई शुरुआत की ..

  21. इस बारे में हमारा राय उलट है.. इसलिए इस बारे में अगर हम मुंह खोलेंगे तो हंगामा हो जाएगा. ताराचंद जी से लेकर सूरज बाबू तक.. इस मासूमोयत के पीछे का सचाई बहुत घिनौना है.. सूरज बाबू थोड़ा बहुत परमपरा तोडने में कामयाब रहे.. दोस्ती फिल्म का सब गाना आज भी पोपुलर है.. लेकिन पता है कि उस फिल्म का दोनों हीरो कहाँ है.. ??? हर चमकाने वाली चीज़ सोना नहीं होती.. जो फल बहुत मीठा हो उसको ध्यान से खाओ.. उसमें कीड़ा होने का संभावना अधिक रहता है..

  22. @बिहारी बाबूआलेख लेखन का नज़रिया एक दर्शक का प्रतीत होता है. मैं भी उनकी साफ़-सुथरी फ़िल्मों का प्रशंसक हूं.बिहारी बाबू जो भी कहें कोई गुरेज़ नहीं कहना संवैधानिक अधिकार है प्रमाण सहित अपने ब्लाग पर कह दें अच्छा लगेगा.

  23. बढ़िया दिलचस्प रंगारंग पोस्ट ! शुभकामनायें अभि !

  24. संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित फिल्में निश्चय ही जनमानस को आकर्षित करती हैं और इस प्रयोग में श्री बड़जात्या बहुत सफल भी रहे हैं।

  25. फिल्मों के बारे में मेरा ज्यादा अनुभव नहीं है मगर पोस्ट अच्छी है इतना अवश्य कह सकता हूँ !
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ
    marmagya.blogspot.com

  26. i liked this article..sooraj barjatya is also my fave director.
    i liked d movie HAHK and VIVA d most..
    n thnx for sharing some useful stuffs wid us..

    loved d article..

  27. मुझे विवाह और हम साथ साथ हैं सबसे ज्यादा पसंद आई थी.
    हम आपके हैं कौन और मैंने प्यार किया भी बहुत अच्छी फ़िल्में थीं.

  28. पहले लगा,अरे मैं इतनी लेट हो गयी इस पोस्ट पर….29 टिप्पणी आ गयीं…बाद में पोस्ट के साथ टिप्पणियों में , आम की गुठलियों के उपयोग के तरीके का भी मजा लिया.

    ये तो पूरा रिसर्च कर डाला है सूरज बडजात्या पर….और पोस्ट पढ़ते हुए सोच रही थी…अरे, मैने भी सारी फिल्मे देखी हैं.
    अच्छी तो 'मैने प्यार किया' ही लगी थी . फ्रेश मासूम चेहरे, सहज अदायगी….सुमधुर गाने…अच्छे डायलॉग { और शायद हम भी उसी उम्र के थे उन दिनों ..इसलिए भी 🙂 }

    'एक विवाह ऐसा भी' के एक्जक्यूटिव प्रोड्यूसर ' सूरज बडजात्या' ही है , शायद …. अभी हाल में टी.वी. पर देखी….आज के बच्चों को शायद ना पसंद आए….सत्तर के दशक का थीम है..पर मुझे अच्छी लगी.

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