फोर्मुला वन एक स्पोर्ट है, एन्टर्टैन्मन्ट नही – रफ़्तार की दुनिया

अगले महीने की 30 तारीख को हमारे देश में पहला फोर्मुला वन रेस होने जा रहा है.जहाँ सभी फोर्मुला वन फैन इस रेस का इंतज़ार न जाने कब से कर रहे हैं और बहुत उत्साहित भी हैं की देश में पहला एफ.वन रेस होने जा रहा है..वहीँ कुछ दिन पहले भारतीय खेल मंत्रालय के एक बयान ने इन सभी फोर्मुला वन फैन्स के दिल में क्रोध भर दिया है.कुछ दिन पहले खेल मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है की फोर्मुला वन एक खेल नहीं बल्कि सिर्फ एक एन्टर्टैन्मन्ट है..इस बयान के पीछे की असली बात ये है की कुछ दिन पहले सरकार ने ये कहा है की फोर्मुला वन इक्विप्मन्ट(कार,स्पोर्ट्स गेअर वैअगारह) जो की रेस के लिए भारत लाये जायेंगे उनपे कस्टम ड्यूटी लगेगी..आमतौर पे किसी भी देश में ऐसा नहीं किया जाता.हर देश के कस्टम डिपार्टमेंट ने ये छूट दे रखी है की वे कार और इक्विप्मन्ट देश में इस शर्त पे आने देंगे की वो सारे इक्विप्मन्ट देश में उतरते ही सीधा एफ.वन सर्किट पहुंचेंगे और फिर खेल के तुरंत बाद जितने भी इक्विप्मन्ट आये हैं सभी वापस री-एक्सपोर्ट कर दिए जायेंगे.लेकिन हमारे देश के खेल मंत्रालय ने इस तरह की भी किसी मदद से साफ़ इनकार कर दिया है.उनका तर्क ये है की फोर्मुला वन खेल के किसी भी मापदंड पे खड़ा नहीं उतरता इसलिए इसे एक खेल नहीं कहा जा सकता..तो क्या सरकार ये बताने का कष्ट करेगी की आखिर खेल के मापदंड होते क्या हैं और वो किस आधार पे फोर्मुला वन को एक खेल नहीं मानती?और अगर वो फोर्मुला वन रेस को एक खेल नहीं मानती तो फिर क्यूँ FMSCI(Federation of Motor Sports Clubs of India) को राष्ट्रीय स्पोर्ट्स फेडरेसन का उसने मान्यता दे रखा है?

इस तरह का बयान देना वो भी किसी देश के खेल मंत्रालय से??मुझे इस बयान पे गुस्सा नहीं आता बल्कि उनकी समझ पे हंसी आती है की किस आधार पे उन्होंने ऐसे बयान दिया?मेरे साथ साथ दुनिया भर के करोड़ों फोर्मुला वन फैन्स भी इस बयान से बहुत नाराज़ और दुखी हैं.अलग अलग एफ.वन न्यूज़ साईट्स और फोरम पे ये खबर काफी चर्चा का विषय रही है और लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं..अधिकांश लोग तो इस बयान पे हंस रहे हैं ये कह कर की भारत-सरकार को खेल की कोई समझ ही नहीं.कई लोगों ने तो ये भी लिखा है की भारत में खेल का मतलब अब सिर्फ क्रिकेट और आई.पी.एल से रह गया है और अन्य खेलों का अब भारत में कोई स्कोप ही नहीं बचा.अगर देखिये तो हर खेल चाहे क्रिकेट,होकी या फुटबाल..सभी एन्टर्टैन्मन्ट ही तो हैं.लेकिन फोर्मुला वन के साथ ही ऐसे सुलूक क्यूँ..दो साल पहले भी भारतीय खेल मंत्रालय ने JPSI को रेस के लिए F1 Commitee को 177cr देने की इजाज़त नहीं दी थी ये कहते हुए की फोर्मुला वन कोई खेल नहीं है, बस एक एन्टर्टैन्मन्ट है और इतने पैसे जो एक रेस कमिटी को दिए जा रहे हैं वो किसी अन्य खेल पर खर्च किये जा सकते हैं.

आश्चर्य की बात ये है की जब फोर्मुला वन कमिटी को पैसे देने की बात आई तब सरकार ने अन्य खेलों के प्रति अपनी चिंता जताई.ऐसे तो सरकार क्रिकेट को छोड़कर बाकी खेलों को तो भूले ही रहती है..अगर सरकार सही मायने में बाकी खेलों के प्रति चिंतित है तो क्यों वो कोई कदम नहीं उठाती अन्य खेलों और बाकी खिलाडियों का प्रोत्साहन करने में??फोर्मुला वन रेस से सरकार इतनी चिढ़ती क्यों है,ये बात मेरे समझ के बाहर है..सरकार के इसी बर्ताव के कारण कितने ऐसे युवा रेसर्स हैं जो बहुत परेसान और दुखी हैं.ये ऐसे युवा रेसर्स हैं जिनके लिए कार और रेसिंग से बड़ा पैशन कुछ भी नहीं.कितने ही ऐसे रेसर्स हैं जो हमारे देश में मोटरस्पोर्ट्स की दुर्दशा को देख विदेशों में जा बसे हैं और हर रेस और प्रतियोगिता में बहुत सफल भी रहे हैं.दुनिया में जितने भी रेस आयोजित किये जाते हैं उन हर रेस के टीम के जो टेस्ट-रेसेर्स होते हैं उनमे भारतीय रेसेर्स की संख्या बहुत है..लेकिन ये भारतीय रेसेर्स बस टेस्ट-ड्राइवर्स ही बने रहते हैं..फोर्मुला वन टीम के भी कितने ही टेस्ट ड्राइवर्स भारतीय हैं.ये मुख्य रेस में हिस्सा क्यों नहीं ले पाते इसके भी कारण हैं..फोर्मुला वन रेस दुनिया का सबसे बड़ा रेसिंग होता है जिसमे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रेसेर्स भाग लेते हैं.इन रेस में भाग लेने के लिए बहुत पैसों और स्पोंसर्स की जरूरत होती है और इन भारतीय टेस्ट-रेसेर्स/ड्राइवर्स को भारत में स्पोंसर मिलते नहीं और नाही सरकार के तरफ से कोई मदद मिलती है(सरकार की तो वैसे इस खेल में थोड़ी भी दिलचस्पी नहीं है).यकीन मानिए इन भारतीय रेसेर्स की प्रतिभा में कोई कमी नहीं है..बस इन्हें मौका नहीं मिलता.इस सम्बन्ध में ही बहुत पहले मेरी एक और पोस्ट आई थी..उसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

सरकार को ये समझना चाहिए की फोर्मुला वन विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय खेलों में से एक है.दुनिया भर में इसके करोड़ों चाहने वाले हैं.दुनिया भर में 550 मिलियन से भी ज्यादा लोग इस रेस को टी.वी से चिपक के देखते हैं.जब तक हमारी सरकार इस छोटी सी बात को नहीं समझती तब तक हमारे देश में फोर्मुला वन रेस और भारतीय रेसर्स का भविष्य अन्धकार में है.अगर सरकार की यही सोच रही तो आने वाले समय में भारतीय एफ.वन फैन का वो सपना सपना ही रह जाएगा की कोई भारतीय रेसर फोर्मुला वन चैम्पिअनशिप जीते.अगर हम चाहते हैं की माइकल शुमाकर, आयर्टन सेन्ना और एलैन प्रोस्ट जैसे रेसेर्स हमारे देश से भी हों तो हमें फोर्मुला वन रेस को सही इज्जत और सम्मान देना ही होगा.

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  1. खेल के सदा ही खेल होता है, क्या कीजियेगा?

  2. शर्म आती हसी ऐसे खेल मंत्रालय पर … पर क्या कीजे …

  3. अभि!
    यह आलेख तुम्हारा कार और स्पीड के प्रति जुड़ाव बल्कि भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है.. क्रिकेट जैसा लोकप्रिय खेल भी अब मात्र मनोरंजन बनकर रह गया है… बहु ही अच्छी पोस्ट!!

  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  6. क्या कहें …. ऐसा होना अफसोसजनक है…. जानकारी देती पोस्ट …

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