फोर्मुला वन रेस और भारतीय रेसर्स – रफ़्तार की दुनिया

ग्रेटर नॉएडा में देश के पहले फोर्मुला वन ट्रैक का काम जोरो से चल रहा है..अगले साल अप्रैल तक काम पूरा होने की उम्मीद है. पहला इंडियन ग्रैंड प्रिक्स अक्टूबर ३०, २०११ को निर्धारित किया गया है. फोर्मुला वन के ऑपरेटिंग एक्जेक्यूटिव और बाकी के सदस्य भारत में बन रहे रेस ट्रैक से काफी खुश दिख रहे हैं. माना जा रहा है की इस रेस ट्रैक में काफी चैलन्जिंग टर्न और चुनौतियाँ मिलने वाली हैं रेसेर्स को. हमारे देश के लिए ये बहुत अच्छी बात है की फोर्मुला वन रेस अब हमारे देश में भी होगा. २००७ से एफ वन ट्रैक की बात चल रही थी, कभी हैदराबाद तो कभी बैंगलोर में एफ.वन ट्रैक बनने की बात होती रही..लेकिन अंत में नॉएडा ही चुना गया ट्रैक बनाने के लिए.
फोर्मुला वन के दर्शक और समर्थक हमारे देश में काफी सिमित हैं.बहुत से लोगों को ज्यादा पता नहीं फोर्मुला वन के बारे में, लेकिन फोर्मुला रेस के शुरू होने के बाद लोग ज्यादा जानेंगे इस खेल के बारे में. इस खेल के बारे में कुछ जरूरी बातें अगर जानना हो तो मेरे दूसरे ब्लॉग के इस पोस्ट को पढ़ें .
करुण

फोर्मुला वन रेस ट्रैक के भारत में बन रहा है..अब हमारा देश भी फोर्मुला वन खेलों से जुड़ गया है, लेकिन इन सब के बीच भारतीय रेसेर्स कहाँ हैं? फोर्मुला वन रेस में भाग लेने के लिए बहुत से पैसों की जरुरत होती है..स्पोंसर्स चाहिए होता है…और भारत में इन खेलों का स्पान्सर लेना कितना आसान है ये आप करुण चंधोक से ही पूछ लें तो बेहतर होगा, जिन्हें स्पान्सर की कमी के कारण फोर्मुला वन रेस को आधे में ही छोड़ना पड़ा था. करुण ने बहुत हाथ पांव मारे लेकिन कहीं से भी उन्हें कोई स्पान्सर नहीं मिल पाया और अंत में उन्हें फोर्मुला वन रेस से हटना ही पड़ा(इस बारे में ज्यादा जानकारियां यहाँ आप ले सकते हैं). फोर्मुला वन रेस सर्किट तक पहुंचना उतना आसान भी नहीं जितना लोग समझते हैं..फोर्मुला वन में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ २०-२२ रेसर्स भाग लेते हैं..ऐसे में अगर स्पान्सर की वजह से किसी भारतीय रेसर को फोर्मुला वन से बाहर होना पड़ता है तो ये भारतीय रेसिंग के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है. एक तरफ तो हम फोर्मुला वन रेस में अपनी एक पहचान बनाने में जुटे हैं और वहीँ दूसरी तरफ भारतीय रेसर स्पान्सर और पैसों से लिए तरस रहे हैं. 

नारायण कार्तिकेन

भारत से दो रेसर फ़िलहाल फोर्मुला वन सर्किट तक पहुंचे हैं, एक तो हैं करुण और दूसरे हैं नारायण कार्तिकेन. कार्तिकेन भारत से पहले रेसर थे जो फोर्मुला वन में भाग लिए थे..उन्होंने 2005 में जॉर्डन टीम के साथ अपनी फार्मूला वन कैरिअर की शुरुआत की थी. लेकिन 2005 के बाद उन्हें मौका नहीं मिला फोर्मुला वन में भाग लेने का..हालांकि 2006 और 2007 में वो विलियम टीम के लिए टेस्ट ड्राइवर रह चुके हैं. उन्हें भी स्पान्सर के कमी के कारण फोर्मुला वन से हटना पड़ा था.अभी वो NASCAR और Sperleauge में भाग ले रहे हैं. उन्होंने भी स्पान्सर की कमी की ओर बहुत बार इशारा किया है और ये बात भी वो बहुत बार कह चुके हैं की अगर हम रेसिंग को गंभीरता से लेना चाहते हैं और इस खेल में अपनी एक पहचान बनाना चाहते हैं तो रेसर्स को हर मुमकिन सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए. 



अरमान

हमारे देश में अच्छे रेसर्स की कोई कमी है…कितने ही रेसर्स हैं जो की पुरे विश्व में बहुत से ग्रैंड प्रिक्स में और रेसेज में अपनी योग्यता साबित कर चुके हैं.ऐसे ही एक रेसर हैं अरमान इब्राहम.पैसों की तंगी और स्पान्सर की कमी के वजह से वो आजकल एक टी.वी सिरिअल “खतरों के खिलाड़ी” में भाग ले रहे हैं. इस सिरिअल से मिलने वाले पैसे से वो अपनी रेसिंग कैरिअर को आगे बढ़ाना चाहते हैं. वो अभी फंड्स के वजह से खासे परेसान भी हैं. अरमान के पीता का कहना है की इस देश में स्पोर्ट्स के लिए ज्यादा स्कोप नहीं है. अगर खेलना है तो क्रिकेट खेलो वर्ना और किसी भी खेल में सरकार या स्पान्सर के तरफ से कुछ भी सहायता नहीं मिलती है.


ये सब बातें बिलकुल भी भारतीय फोर्मुला वन के लिए अच्छी बात नहीं है. अगर हमें फोर्मुला वन खेलों को गंभीरता से लेना ही नहीं था तो इतने करोड़ खर्च कर के क्या जरुरत थी फोर्मुला वन ट्रैक बनाने की.भारतीय फोर्मुला वन रेसर्स के भविष्य पे भी कई सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में इन रेसर्स की दाद देनी चाहिए की वो अपने दम पे स्पान्सर खोज रहे हैं, और फंडिंग भी खुद जुगाड़ करने की कोशिश में लगे हुए हैं. करुण अगले साल होने वाले रेस के लिए काफी आशान्वित हैं और उन्हें यकीन हैं की किसी टीम में उनको जगह मिल जायेगी.लेकिन ऐसे में ये देखना होगा की क्या स्पान्सर की कमी के कारण अगले साल भी उन्हें फोर्मुला वन रेस से बाहर होना परेगा ? 

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  1. ग्रेटर नॉएडा में देश के पहले फोर्मुला वन ट्रैक का काम जोरो से…………
    आप की रचना चोरी हो गयी है …… यहाँ पर देख लीजिये
    chorikablog.blogspot.com/2010/10/blog-post_35.html

  2. sahi mein ye to ek vishay hai hin. narain kartiyken is a great racer…even karun did a good job this year…it is reallly unfortunate that this things happening in our country….lets hope for the best….

    by d way mujhe baaki ke do post nahi dike theein…i just saw….unhe bhi padhna baaki hai……

  3. and the track really looks good yaar….looking forward to indian gp 2011….

    and all d best for karun…hope ki unhe sponsars mil jaayenge

  4. @दिव्या

    मेरे दो पोस्ट और हैं, पता नहीं क्यों कहीं भी वो अपडेट नहीं हुए….गूगल रीडर पे भी नहीं
    पढ़ लेना दोनों पोस्ट…

  5. अरे वाह सुना है हमारे घर के आगे से ही निकल रही है रोड …मजा आ गया 🙂

  6. क्रिकेट के अलावा सही में कोई खेल को महत्त्व ज्यादा नहीं मिलता अपने देश में.सभी cricket crazy हैं

  7. मुझे इस खेल के बारे में तो ज्यादा जानकारी नहीं है. लेकिन अपने देस में खेल हो रहा है तो आशा करती हूँ की ठीक से ही निबट जाए

  8. अभि, ई त बहुत नाइंसाफी है.. तुमरा अप्डेट मिलिए नहीं रहा है.. अंदाजे से आए त देखे कि तुमरा कार अऊर इस्पीड प्रेम है यहाँ. . सचमुच गजब का दुर्दसा है.. एगो खिलाड़ी को अपना खेल के लिए खतरों के खिलाड़ी में भाग लेना पड रहा है… एही सब कारण से हमरे समाज में खेल का स्थिति खराब है. अब देखो, तुमरे हाथ में बैट अच्छा लगता है, कभी सोचे भी होगे कि सचिन बन जाएँ..मगर, सोचे कुछ, पढे कुछ, बने कुछ अऊर अब कर कुछ अऊर रहे हो. अफसोस हुआ तुमरा पोस्ट पढकर. जो बिकता है उसी को स्पॉन्सर्स निलता है. क्रिकेट में बेसुमार दौलत है, खेलकर भी, जीतकर भी, हारकर भी! क्या नियति है!!

  9. चचा जी बहुत से दोस्त कह चुके हैं मेरे की उन्हें इस ब्लॉग का अपडेट दिख ही नहीं रहा 🙁 पता नहीं क्या दिक्कत आ रही है..
    गूगल रीडर पे भी फीड नहीं दिख रहा था…कल से दिखने लगा, शायद अब अगले पोस्ट से सब ठीक हो जाए

  10. बड़े विस्तार से अच्छी जानकारी दी…अभिषेक
    यह तो बड़ी अच्छी बात है कि अब फ़ॉर्मूला वन रेस…हमारे भारत में भी शुरू हो जाएगी…नवयुवकों में तो यह बहुत लोकप्रिय होगा…पर जहाँ तक खिलाडियों के ग्रूमिंग की बात है..वह तो मुश्किल ही लगता है…हर खेल का वही हाल है…हम आयोजित करेंगे…विदेशी कप लेकर चले जाएंगे 🙁

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