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Literature and Books

रसिया व् स्पोमिन्नानियाख – स्मृतियों में रूस

'स्मृतियों में रूस' को लेकर मैं बहुत पहले से काफी उत्साहित था.शायद आजतक मैं किसी भी किताब को लेकर इतना उत्साहित कभी नहीं रहा.इसकी...

आईये, ग़ालिब और गुलज़ार साहब के साथ कुछ लम्हे बिताया जाये

हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे, कहते हैं कि गालिब का है अंदाज ए बयां और -गुलज़ार कभी कभी कोई रात फिल्म देखकर गुज़रती है...तो...

मनुष्य जरूरत पड़ने पर अपने को किसी भी जीवन ढाँचे में ढाल सकता है – निर्मल वर्मा के पत्र

(इन खतों को जिस दिन मैंने पढ़ा था, उसके बाद इसमें से कुछ न कुछ ड्राफ्ट में सेव करता गया.पोस्ट काफी बड़ी और क्लटरड...

लिखना जैसे मेरे जीने का सहारा है – निर्मल वर्मा के संकलित पत्र

पिछले महीने पटना में एक किताब खरीदी थी - 'प्रिय राम'.इस किताब में निर्मल वर्मा के द्वारा अपने बड़े भाई चित्रकार रामकुमार को लिखे...

आज मैं पूरी तरह से सतुष्ट हूँ,पहले से कहीं अधिक – सुखदेव के नाम भगत सिंह का पत्र

सुखदेव और भगत सिंह दोनों अभिन्न साथी थे.उनकी मित्रता का आधार दोनों की अध्यन-शीलता थी.सुखदेव की संगठन-शक्ति अदभुत थी,पर उनमें मानसिक स्थिरता की कमी...

किताबों का खोता अस्तित्व – एक आदत जो हम भूल चुके हैं

बहुत पहले की बात है, किसी अखबार या पत्रिका में पढ़ा था एक पुराने गुमनाम उर्दू शायर के बारे में(नाम नहीं याद)..किताबों से इतना...

इन्कलाब जिन्दाबाद क्या है? – जानिये सरदार भगत सिंह के पत्र के माध्यम से

पिछले महीने एक किताब खरीदी - "सरदार भगत सिंह-पत्र और दस्तावेज". इस किताब में भगत सिंह के द्वारा लिखे गए पत्रों का संकलन है...

नाम वहीँ लिखे जाते हैं, जहाँ आदमी टिककर रहे – निर्मल वर्मा की किताबों से कुछ अंश

(फिर से डायरी से निकला एक पन्ना, इस बार निर्मल वर्मा के किताबों से कुछ जो मैंने कभी नोट कर के रख लिया था..अलग...

कुछ लम्हे गुलज़ार साहब के साथ – झूम के फिर उट्ठे हैं बादल

तमाम सफ़हे किताबों के फड़फडा़ने लगे हवा धकेल के दरवाजा़ आ गई घर में! कभी हवा की तरह तुम भी आया जाया करो! सुबह सुबह जब उठा...

गुलज़ारिश टच – आइये कुछ लम्हे गुलज़ार साहब के साथ बिताएं

क्या पता कब कहाँ मारेगी बस कि मैं ज़िंदगी से डरता हूँ मौत का क्या है, एक बार मारेगी गुलज़ार की कुछ ग़ज़लें कुछ नगमें,उनकी कायनाती आवाज़...

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