विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली – मेरी नज़र से (2) – रिपोर्ट

विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली का थीम इस बार पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन है. थीम पेवालियन में इस बार पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसे विषयों पर बहुत सी पुस्तकें हैं जो यहाँ प्रदर्शित की गयी हैं और ये सब विषय पर यहाँ लगातार चर्चाएँ हो रही हैं. पर्यावरण और इससे सम्बंधित जानकारियाँ जैसे हम अपने पर्यावरण की रक्षा कैसे करे, वो यहाँ चित्रों द्वारा दिखाई गयी है जो बच्चों के लिए बहुत लाफदायक है. कुछ तस्वीरें हैं जो मैंने लिए हैं थीम पेवलियन की –

 

 

 

कुछ बेहद अच्छी किताबें दिखी थीम पेवेलियन में. यहाँ रीडिंग ज़ोन भी बनाया हुआ है, जहाँ आप बैठ कर ये किताबें पढ़ सकते हैं.

 

 

थीम पवेलियन के बगल में दो और हॉल हैं, एक फोरेन हॉल है, जहाँ विभिन्न देशों के किताबें उपलब्ध हैं, और दूसरा चिल्ड्रेन्स गैलरी, जहाँ बच्चों की किताबें हैं. इस बार अतिथि(गेस्ट ऑफ़ ऑनर) यूरोपियन यूनियन हैं. इस लिए फॉरेन गैलरी में वहीँ की अधिकतर किताबें थीं. इस हॉल में भीड़ देखने को नही मिली. उसकी वजह ये है कि यहाँ सिर्फ वही लोग आते हैं जिन्हें इन किताबों में रुचि हो.

इस पेवेलियन में इटली, जर्मनी, स्वीडेन, पोलैंड जैसे अन्य देशों की किताबें हैं. अधिकतर किताबें जो यहाँ प्रदर्शित की गयी हैं वो उसी देश के भाषा में है जहाँ की वो किताबें हैं. लेकिन बहुत सी किताबें यहाँ अंग्रेजी भाषा में भी है. एक सरसरी निगाह देखने से वो किताबें काफी रोचक मालूम पड़ी मुझे. स्वीडेन के स्टाल पर कुछ हिंदी किताबें भी हैं. असल में स्वीडिश लेखकों की किताबों का वो हिंदी अनुवाद है. भले हम इन देशों की भाषा न समझते हो, लेकिन इस हॉल में आना अच्छा लगा मुझे.

थीम पेवलियन के दूसरी ओर चिल्ड्रेन्स हॉल है जहाँ बच्चों की किताबें मिलेंगी आपको. एन.सी.आर.टी से लेकर हार्पर कॉलिंस की किताबें से लेकर अमर चित्र कथा, बच्चों के हॉल में आपको सभी तरह की किताबें मिल जायेंगी. जहाँ नेशनल बुक ट्रस्ट में बच्चों की कहानियों से लेकर जानकारी वाली किताबें भी मिलेंगी वहीँ हार्पर कॉलिंस जैसे स्टाल में बच्चों के लिए मनोरंजक कहानियां भी मिलेंगी. बच्चों के पेवेलियन में मुझे सबसे अच्छा स्टाल नेशनल बुक ट्रस्ट का ही लगा. यहाँ छोटे बच्चों से लेकर स्कूल और कॉलेज में पढने वाले विद्यार्थियों के लिए ऐसी ऐसी किताबें हैं जो उन्हें काफी बातों से अवगत करवाएंगी. यहाँ मनोरंजक कहानियां भी हैं और कुछ ऐसी कहानियां भी जिससे बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं.

 

 

 

 

 

इस बार के पुस्तक मेले में, जितने अच्छे से मैंने हिंदी के स्टाल देखे, उतने किसी हॉल के स्टाल नहीं देख पाया. इसकी वजह थी कि मुझे किताबें हिंदी की ही खरीदनी थी, इसलिए ज्यादा दुसरे स्टाल पर घूम नहीं पाया. लेकिन पुस्तक मेला अभी भी पाँच दिन और है, और इन पाँच दिनों में बाकी दुसरे स्टाल भी घुमने का इरादा है.

इंग्लिश की किताबें जिस हॉल में लगी हुई हैं, वो है हॉल संख्या 10 और 11. यहाँ इंग्लिश के सब छोटे बड़े प्रकाशक मिल जायेंगे. मुझे इस हॉल में कुछ स्टाल बड़े दिलचस्प लगे. एक मदान बुक कलेक्शन का स्टाल, जहाँ मुझे कई इंग्लिश पोएट्री की किताबें मिल गयी, जो की सेकंड हैण्ड किताबें थी. मुझे ख़ास फर्क नहीं पड़ता कि किताबें मैंने सेकंड हैण्ड खरीदी हैं या नयी. मुझे पढ़ने में ज्यादा रूचि है. क्लासिक इंग्लिश पोएट्री की किताबें आसानी से नहीं मिलती, और जो मिलती हैं वो बड़ी महंगी मिलती हैं, ऐसे में सौ-डेढ़ सौ रुपये में किताबें मिल जाने से अच्छा कुछ भी नहीं. यहाँ कुछ और भी बेहतरीन इंग्लिश की किताबें मुझे दिखी, जो शायद आपको कहीं और न मिले. लेकिन इन्होने स्टाल पर किताबे ठीक से लगाई नहीं हैं. नयी और पुरानी किताबें दोनों मिल गयी हैं जिससे आपको ढूँढना पड़ता है किताबें. इस स्टाल के ठीक सामने ही एक और स्टाल दिखा जहाँ बहुत सी पुरानी और नायब इंग्लिश लिटरचर की किताबें दिखी. हालाँकि यहाँ किताबें थोड़ी महंगी थी, लेकिन इनके स्टाल पर आप एक बार चक्कर लगा सकते हैं.

 

 

इंग्लिश के स्टाल में और भी बहुत अच्छी अच्छी किताबें दिखी मुझे, लेकिन ज्यादा वक़्त न लगाते हुए मैं फिर से वापस हिंदी के किताबों के हॉल में आ गया. हिन्दी में एक स्टाल जो मुझे हमेशा ज्यादा अच्छा लगता है वो है ‘महात्मा गाँधी अन्तराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा’ का स्टाल. इस लगाव के पीछे एक वजह भी है. इनकी मैगज़ीन तो अच्छी होती ही है, लेकिन जो छवि-संग्रह की सीरीज इन्होने निकाली है, वो बेहद नायब है. फाइल फोल्डर में ये हिंदी के बड़े साहित्यकारों की छवि-संग्रह निकालते हैं. मेरे पास तीन लेखकों के छवि-संग्रह हैं जो मैंने यहीं से लिए थे – निर्मल वर्मा, भीष्म साहनी और केदारनाथ अगरवाल.
इस बार इन्होने सुमित्रानंदन पन्त की एक पोस्टर भी निकाली है, जो मुझे बेहद आकर्षक लगा.
इस पुस्तक मेला में एक स्टाल को देख थोड़ा आश्चर्य हुआ. बाबा रामदेव का पतंजलि साहित्य. पहली बार पुस्तक मेले में मैंने देखा इनका स्टाल. मैं सोचने लगा कि ये कौन सा साहित्य है? अन्दर जाकर हॉल में किताबें देखी भी लेकिन साहित्य जैसा कुछ दिखा नहीं.
पतंजलि के ठीक सामने ही मुझे बच्चों की किताबों का एक बड़ा अच्छा स्टाल दिखा. स्टाल संख्या 108, इकतारा. यहाँ बच्चों के लिए खूब अच्छी चित्रकारी और पेंटिंग की हुई कवितायेँ दिखी मुझे जो बड़ी क्रिएटिव लगी.

 

इस बार के पुस्तक मेला में My Book Publication के स्टाल पर रेख्ता की किताबें भी उपलब्ध हैं. रेख्ता उर्दू शायरी का एक बड़ा वेबसाइट और आर्गेनाइजेशन है और इनकी किताबें पुस्तक मेला में देखना सुखद रहा.
पुस्तक मेला की वैसे तो और भी कई तस्वीरें और बहुत सी कहानियाँ हैं, जो कल या परसों तक इसी ब्लॉग पर मैं साझा करूँगा आपके साथ. फ़िलहाल तो पुस्तक मेला पाँच और दिन है दिल्ली में. आप अभी तक अगर यहाँ नहीं आये हैं, तो तुरंत आइये मेले में घुमने के लिए… इतनी किताबें फिर साल भर बाद देखने को मिलेंगी.
फ़िलहाल, आज के लिए इतना ही.. बाकी बातें अगले पोस्ट में..

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  1. अरे!यानि कुछेक स्टॉल हमसे छूट गए इस बार…। चलो, तुम्हारी नज़रों से देख लिया ☺️

  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन श्रद्धा-सुमन गुदड़ी के लाल को : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है…. आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी….. आभार…

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