CATEGORY

Shayari and Poetries

कोयल :कैक्‍टस : कवि – हरिवंशराय बच्चन

हरिवंशराय बच्चन ने इस कविता में कैसे तीन अलग अलग छवियाँ प्रस्तुत की हैं. एक कोयल की, एक कैक्टस और उसके फूल और एक...

कविता: गाँव की धरती – नरेन्द्र शर्मा

गाँव की आबो-हवा और सरसों के खेत किसे नहीं भाते हैं? जिन्हें भी खेतों से लगाव है, नरेन्द्र शर्मा की ये कविता उनके लिए...

कविता: शाम बेच दी है – केदारनाथ सिंह

हमनें न जाने क्या क्या खोया है, इस आधुनिकता की चकाचौंध में. कुछ पाने के लिए कितना कुछ खोना पड़ा. वो शामें जो कभी...

गली क़ासिम में आकर – ग़ालिब की गलियों में घूमते हुए

गली क़ासिम में आकर , तुम्हारी ड्योढ़ी पे रुक गया हूँ मिर्ज़ा नौशा तुम्हे आवाज़ दूँ , पहले , चली जाएँ ज़रा , परदे में उमराव ,...

चेहरे – सामाज और लोगों पर लिखी एक कविता

इतने चेहरे नज़र आते हैं सड़कों पे, किसी के चेहरे पे है खुशी तो किसी के चेहरे पे निराशा हँसते हुए चेहरे को देख, अक्सर हम समझते हैं...

मैं हूँ आज की नारी – नारी शक्ति पर लिखी एक कविता

मैं हूँ आज की नारी.. मैं ही दुर्गा हूँ, मैं ही सरस्वती... मैं कृष्ण की राधा भी हूँ.. और सीता भी.. फिर आज क्यों, अक्सर लज्जित भी होना पड़ता है...

Latest news