Tag:Agyeya

नयी कहानी का प्लॉट – अज्ञेय

  रात के ग्यारह बजे हैं; लेकिन दफ़्तर बन्द नहीं हुआ है। दो-तीन चरमराती हुई लंगड़ी मेजों पर सिर झुकाये, बायें हाथ से अपनी तक़दीर...

सभ्यता का एक दिन – अज्ञेय

  नरेन्द्र जीवन के झमेलों से बेफ़िक्र रहता था। लापरवाही उसका सिद्धान्त था। राह-चलते जो मिल गया, ले लिया और चलते बने। सुख मिला, हँस...

संस्कृति और परिस्थिति – अज्ञेय

यदि आप आधुनिक हिंदी साहित्य की प्रगति से तनिक-सा भी परिचय रखते हैं, तब आपने अनेकों बार पढ़ा या सुना होगा कि हिंदी आश्चर्यजनक...

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भाभी – इस्मत चुग़ताई

  भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से पंद्रह बरस की होगी। बढवार भी तो पूरी नहीं हुई थी।...

जडें – इस्मत चुग़ताई

  सबके चेहरे उड़े हुए थे। घर में खाना तक न पका था। आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े,...

चौथी का जोडा – इस्मत चुग़ताई

  सहदरी के चौके पर आज फिर साफ - सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी - फूटी खपरैल की झिर्रियों में...

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सवेरे जो कल आँख मेरी खुली – सआदत हसन मंटो

  अज़ब थी बहार और अज़ब सैर थी! यही जी...

लिखना जैसे मेरे जीने का सहारा है – निर्मल वर्मा के संकलित पत्र

पिछले महीने पटना में एक किताब खरीदी थी -...