Tag:Amritlal Nagar

सिकंदर हार गया – अमृतलाल नागर

  अपने जमाने से जीवनलाल का अनोखा संबंध था। जमाना उनका दोस्‍त और दुश्‍मन एक साथ था। उनका बड़े से बड़ा निंदक एक जगह पर...

दो आस्थाएँ – अमृतलाल नागर

  अरी कहाँ हो? इंदर की बहुरिया! - कहते हुए आँगन पार कर पंडित देवधर की घरवाली सँकरे, अँधेरे, टूटे हुए जीने की ओर बढ़ीं। इंदर...

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भाभी – इस्मत चुग़ताई

  भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से पंद्रह बरस की होगी। बढवार भी तो पूरी नहीं हुई थी।...

जडें – इस्मत चुग़ताई

  सबके चेहरे उड़े हुए थे। घर में खाना तक न पका था। आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े,...

चौथी का जोडा – इस्मत चुग़ताई

  सहदरी के चौके पर आज फिर साफ - सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी - फूटी खपरैल की झिर्रियों में...

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दादी-अम्मा – कृष्णा सोबती

कृष्णा सोबती की लिखी कहानी 'दादी-अम्मा' एक बेहद...

मोरा गोरा रंग लई ले – मेकिंग ऑफ़ अ सोंग(३)

मोरा गोरा रंग लई ले इस गीत का जन्म...