Tag:Gulzar

तक़सीम – गुलज़ार

जिन्दगी कभी-कभी जख्मी चीते की तरह छलाँग लगाती दौड़ती है, और जगह जगह अपने पंजों के निशान छोड़ती जाती है। जरा इन निशानों को...

धुआँ – गुलज़ार

बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में “धुआँ” भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई...

हमारे एयरकंडीशनर हमसे हमारे मौसम छीन रहे हैं, और हमें इसकी खबर ही नहीं

मैं अपने स्कूल के दिनों की बातें करूँ, तो मुझे गर्मियों के दिन प्यारे लगते थे. कई वजह थे इसके. हम उन दिनों सरकारी...

मिर्ज्या – एक विसुअल और पोएटिक मास्टरपीस

जब से सुना था इस फिल्म के बारे में तब से ही काफी ज्यादा उत्सुकता थी. राकेश ओमप्रकाश मेहरा मेरे सबसे प्रिय डायरेक्टर में...

गली क़ासिम में आकर – ग़ालिब की गलियों में घूमते हुए

गली क़ासिम में आकर , तुम्हारी ड्योढ़ी पे रुक गया हूँ मिर्ज़ा नौशा तुम्हे आवाज़ दूँ , पहले , चली जाएँ ज़रा , परदे में उमराव ,...

जयमाला : गुलज़ार साहब के साथ कुछ लम्हें -१०

आज की ये ख़ास पोस्ट है, गुलज़ार साहब के जन्मदिन के मौके पर. सोचा तो था आज कुछ अपनी बात कहूँगा, कुछ गुलज़ार साहब...

पंचम दा के कुछ अनरिलीजड गाने – कलेक्सन

कुछ पंचम दा के अनरिलीज गाने हैं, जिन्हें आज अपने ब्लॉग पर लगा रहा हूँ. सबसे पहला गाना जो लगा रहा हूँ वो है...

मीना कुमारी, एक अदाकारा, एक शायरा – एक एहसास

मीना जी चली गईं..कहती थीं - राह देखा करेगा सदियों तक, छोड़ जाएंगे यह जहां तन्हा ...और जाते हुए सचमुच सारे जहान को तन्हा कर गईं; एक...

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भाभी – इस्मत चुग़ताई

  भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से पंद्रह बरस की होगी। बढवार भी तो पूरी नहीं हुई थी।...

जडें – इस्मत चुग़ताई

  सबके चेहरे उड़े हुए थे। घर में खाना तक न पका था। आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े,...

चौथी का जोडा – इस्मत चुग़ताई

  सहदरी के चौके पर आज फिर साफ - सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी - फूटी खपरैल की झिर्रियों में...

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पन्द्रह अगस्त और कुछ यादें, बातें मेरी – नास्टैल्जिया

पंद्रह अगस्त...जाने क्या क्या यादें जुड़ी हैं इस एक...

विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली – मेरी नज़र से (2) – रिपोर्ट

विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली का थीम इस बार पर्यावरण...