Tag:Saadat Hasan Manto

खुदा की कसम – सआदत हसन मंटो

  उधर से मुसलमान और इधर से हिंदू अभी तक आ जा रहे थे। कैंपों के कैंप भरे पड़े थे जिनमें मिसाल के तौर पर...

सवेरे जो कल आँख मेरी खुली – सआदत हसन मंटो

  अज़ब थी बहार और अज़ब सैर थी! यही जी में आया कि घर से निकल टहलता-टहलता ज़रा बाग़ चल। बाग़ में पहुँचने से पहले...

ठंडा गोश्त – सआदत हसन मंटो

ईश्वरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दांखिला हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और...

साम्यवाद – सआदत हसन मंटो

  वह अपने घर का तमाम ज़रूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था। रास्ते में कुछ लोगों ने उसे देखा और ट्रक...

सफ़ाई पसन्दी – सआदत हसन मंटो

गाड़ी रुकी हुई थी। तीन बन्दूकची रेल के एक डिब्बे के पास आए। खिड़की में से भीतर झाँककर उन्होंने डिब्बे में बैठे मुसाफिरों से पूछा —...

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भाभी – इस्मत चुग़ताई

  भाभी ब्याह कर आई थी तो मुश्किल से पंद्रह बरस की होगी। बढवार भी तो पूरी नहीं हुई थी।...

जडें – इस्मत चुग़ताई

  सबके चेहरे उड़े हुए थे। घर में खाना तक न पका था। आज छठा दिन था। बच्चे स्कूल छोड़े,...

चौथी का जोडा – इस्मत चुग़ताई

  सहदरी के चौके पर आज फिर साफ - सुथरी जाजम बिछी थी। टूटी - फूटी खपरैल की झिर्रियों में...

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ठाकुर का कुआँ – प्रेमचंद

1 जोखू ने लोटा मुंह से लगाया तो पानी में...